Tribhanga: काजोल की ‘त्रिभंग’ नेटफ्लिक्स पर मचा रही है हंगामा, तीन पीढ़ी की महिलाओं की है। कहानी

ओटीटी (OTT) प्लेटफॉर्म पर रिलीज हुई रेणुका साहने (Renuka Sahne) की डायरेक्शन में बनी मूवी ' त्रिभंग ' (Tribhanga) नेटफ्लिक्स (Netflix) पर हंगामा मचा रही है,

Tribhanga: काजोल की ' त्रिभंग ' नेटफ्लिक्स पर मचा रही है हंगामा, तीन पीढ़ी की महिलाओं की है। कहानी
Tribhanga: काजोल की ' त्रिभंग ' नेटफ्लिक्स पर मचा रही है हंगामा, तीन पीढ़ी की महिलाओं की है। कहानी
  • काजोल की ‘ त्रिभंग ‘ नेटफ्लिक्स पर मचा रही है हंगामा
  • तीन पीढ़ी की महिलाओं की है। कहानी
  • त्रिभंग के लीड में काजोल अनुराधा के रोल में है 

(प्रेरणा मिश्रा), Tribhanga: ओटीटी (OTT) प्लेटफॉर्म पर रिलीज हुई रेणुका साहने (Renuka Sahne) की डायरेक्शन में बनी मूवी ‘ त्रिभंग ‘ (Tribhanga) नेटफ्लिक्स (Netflix) पर हंगामा मचा रही है, यह एक नए कांसेप्ट और कहानी के साथ प्रस्तुत की गई है,यह तीन पीढ़ी की महिलाओं की कहानी है।

त्रिभंग के लीड में काजोल अनुराधा के रोल में, तनवी आजमी नयनतारा के और मिथिला पालकर माशा के रोल में है। एक कहानी, परन्तु तीन पीढ़ियां, तीन दृष्टिकोण, तीन जीवन, तीन विचारधारा इस कहानी में आपको देखने को मिलेगी जैसे एक डिवोर्सी परिवार का जीवन,एक नाजायज संबंध का प्रभाव इत्यादि।

मूवी के एक डायलॉग में अनुराधा (काजोल) कहती है कि “नयन एक पागल और बुद्धिमान औरत है इसीलिए वह अभंग है, माशा एक शांत और व्यवस्थित रहने वाली लड़की है इसीलिए वह सभंग है पर मैं थोड़ी पागल, अटपटी हूं इसीलिए मुझे त्रिभंग कह सकते हो” इसीलिए इस मूवी का नाम भी त्रिभंग है।

 

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रेणुका साहने की मूवी अक्सर समाज में एक अलग पहचान के रूप में खड़ी होती है फिर चाहे वो थप्पड़ हो,गुंजन सक्सेना हो या पिंक जैसी मूवी हो इसी तरीके से त्रिभंग भी एक आत्मनिर्भर महिला की कहानी है साथ ही इसमें तलाक के बाद परिवार में बिखराव, सेक्सुअल असॉल्ट और डोमेस्टिक वॉयलेंस भी देखने को मिलेगा तथा यह भी पता चलेगा की किस प्रकार से जो आपके साथ हो चुका है, वह चीज अगली पीढ़ी के साथ भी हो सकता है परन्तु अलग रूप लेकर, बस हमें उसे पहचाना होता है।

इस कहानी में डायलॉग्स और नर्रेशन ठीक ठाक है,कहीं कहीं अनुराधा यानी काजोल की एक्टिंग ओवर लगने लगती है,माशा का किरदार नयन और अनुराधा से काफी अलग दिखाया गया है साथ ही इसमें मिलन के रोल में कुणाल रॉय कपूर ने हिंदी लेखक का किरदार निभाया है जो नयन की आत्मकथा लिखने में उनकी मदद कर रहा होता है,जितना सीधा इस किरदार में एक लेखक को दिखाया गया है ऐसा आज के समय में कम देखने को मिलता है नयन को कोमा का अटैक आने के बाद कैसे सभी अलगाव ख़त्म होते है असल में यह कहानी पूरी उसपर है।

एक घंटे पेत्तिस मिनट की यह मूवी दर्शकों को बोर नहीं होने देती क्योंकि इसमें नारीवाद के साथ साथ डायलॉग्स में थोड़ा मसाला भी डाला गया है,आम तौर पर लड़को को गाली देते हुए देखा जाता है परन्तु इसमें अनुराधा अपनी बात की शुरुआत ही गालियों के से उपयोग से करती है।इसमें मानव गोहिल,वैभव, श्वेता मेहेंदा,कंवलजीत सिंह भी है,यह एक अच्छी कहानी है इससे देखने के बाद आपका समय बिल्कुल बर्बाद नहीं होगा आपकी दृष्टिकोण में बदलाव जरूर हो सकता है साथ है कई सवाल आपके मन में आयेंगे जो इस मूवी का एकमात्र कार्य था मूवी में सभी को कांसेप्ट काफ़ी क्लीयर दिखते है परन्तु इससे बेहतर किया जा सकता था यह एक दो बार देखने वाली मूवी है परन्तु बार बार देखने पर यह आपको बोर कर सकती है।

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