मीराबाई चानू ने भारत को शानदार जीत दिला रचा इतिहास, वेटलिफ्टिंग में जीता सिल्वर मेडल, जानिए उनकी सफलता के पीछे की कहानी

टोक्यो ओलंपिक में मीराबाई चानू ने वेटलिफ्टिंग प्रतियोगिता में सिल्वर मेडल हासिल कर इतिहास रच डाला। यह भारत के लिए काफी गौरवशाली पल था।

मीराबाई चानू ने भारत को शानदार जीत दिला रचा इतिहास, वेटलिफ्टिंग में जीता सिल्वर मेडल, जानिए उनकी सफलता के पीछे की कहानी
मीराबाई चानू ने भारत को शानदार जीत दिला रचा इतिहास, वेटलिफ्टिंग में जीता सिल्वर मेडल, जानिए उनकी सफलता के पीछे की कहानी

टोक्यो ओलंपिक में मीराबाई चानू ने वेटलिफ्टिंग प्रतियोगिता में सिल्वर मेडल हासिल कर इतिहास रच डाला। यह भारत के लिए काफी गौरवशाली पल था। क्यूंकि टोक्यो ओलंपिक में भारत का ये पहला पदक है। जिसके चलते मीराबाई चानू को देशभर से अनेको बधाई मिल रही है। बता दें मीराबाई चानू ने शनिवार को टोक्यो ओलंपिक -2020 में महिलाओं के 49 किलोग्राम भारवर्ग में रजत पदक अपने नाम किया। और साथ ही वह ओलिंपिक खेलों में रजत पदक जीतने वाली दूसरी महिला खिलाड़ी बन गईं। इस खास मौके पर उन्हे देश के प्रधानमंत्री मोदी और खेल मंत्री अनुराग ठाकुर ने ट्वीट के जरिये बधाई दी।

ऐसे मिली जीत
बता दें मीराबाई ने स्नैच और क्लीन एंड जर्क राउंड मिलाकर कुल 202 किलो वजन उठाया। जिसमे उन्होंने सिल्वर मेडल जीता। वही 49 किलोग्राम भारवर्ग प्रतियोगिता में गोल्ड मेडल चीन की जीहोई होउ ने अपने नाम किया। मीराबाई चानू ने स्नैच में तीन राउंड किये। जिनमे से उनका पहला और दूसरा प्रयास सफल रहा जबकि तीसरे राउंड में उनको असफलता हाथ लगी। मीराबाई चानू को पहले प्रयास में 81 किलोग्राम वजन, दूसरे में 87 किलोग्राम वजन और तीसरे में 89 किलोग्राम वजन उठाना था। अगर उनका तीसरा राउंड भी सफल हो जाता तो ये उनके लिए स्नैच राउंड का पर्सनल बेस्ट होता।

इसके साथ ही क्लीन एंड जर्क राउंड के पहले राउंड में मीराबाई चानू ने 110 किलो वजन उठाया, वही दूसरे राउंड में 115 किलो और तीसरे प्रयास में वो 117 किलो वजन उठाने में विफल साबित हुई। जिसके बाद उनके साथ खड़ी चीनी वेटलिफ्टर ने इस राउंड में 116 किलो का भार उठाते हुए स्वर्ण पदक अपने नाम किया।

सिल्वर मेडल जीत रचा इतिहास
इससे पहले भी मीराबाई चानू ने कई उपलब्धियां हासिल की है। वही इस बार उन्होंने टोक्यो ओलम्पिक में सिल्वर मेडल जीत इतिहास रच डाला है। दरअसल, महिला वेटलिफ्टिंग में भारत को हासिल हुआ यह दूसरा मेडल है। इससे पहले साल 2000 में सिडनी ओलिंपिक में कर्नम मल्लेश्वरी ने पहला मेडल अपने नाम किया था। वही 21 साल बाद महिला ओलम्पिक मेडल जीत मीराबाई चानू बैडमिंटन स्टार पीवी सिंधु के बाद दूसरी भारतीय महिला एथलीट भी बन गई हैं।

मीराबाई चानू की कामयाबी की कहानी
आइये जानते है किन कठिन परिस्थितियों में मीराबाई चानू ने अपनी इस अनोखी प्रतिभा में बाहर निकाला। और इसके लिए उन्हे कितने प्रयास और मेहनत भी करनी पड़ी। जिसके बाद आज उन्होंने देश का और अपने परिवार का नाम रोशन किया है।

– मीराबाई चानू का जन्म 8 अगस्त 1994 को इम्फाल (मणिपुर) के छोटे से गाँव में हुआ था

– उनकी उम्र मात्र 26 वर्ष है

– बहुत छोटी ही उम्र से वो जंगल में अपने भाई के साथ लकड़ियां बीनने जाया करती थी, और वो सबसे भारी लकड़ी के गट्ठर को भी उठा लिया करती थी
– जिसके बाद 12 वर्ष की उम्र में उनके परिवार ने उनकी इस प्रतिभा को पहचाना, और उन्हें वेटलिफ्टिंग के प्रयास के लिए प्रोत्साहित किया

– मीराबाई अपने अभ्यास के लिए गाँव से करीब 22 किलोमीटर का सफर तय करके रोज सुबह जाती थी

– मीराबाई ने तीरंदाज के तौर पर ट्रेनिंग न मिलने के बाद कक्षा आठवीं में मणिपुर की कुंजुरानी की कहानी पढ़ने के बाद फिर एक बार वेटलिफ्टर बनने का फैसला किया

– शुरुआत में उनके माता-पिता के पास इतने साधन नहीं होने की वजह से उन्हें काफी दिक्क्तों का सामना भी करना पड़ा

-मीराबाई चानू ने जब साल 2007 में अपना अभ्यास शुरू किया उस वक़्त उनके पास लोहे के बांस नहीं थे जिसके चलते उन्होंने लकड़ी के बांस से अभ्यास किया

– और अपनी इन्ही सब मेहनत और लगन के बल पर उन्होंने आज भारत को टोक्यो ओलिंपिक समेत कई बड़ी उपलब्धियां दिलाई

– वही साल 2016 रियो ओलिंपिक क्वालीफाई करने लेने के बावजूद वो सफल नहीं हो पाई थीं।
– जिसके बाद वो काफी डिप्रेशन में रहने लगी थी और उन्होंने अपने इस करियर को खत्म करने का मन भी बना लिया था

– लेकिन इसके बाद उन्होंने अपने अंदर जूनून जगाया और साल 2017 में वर्ल्ड चैंपियनशिप प्रतियोगिता में गोल्ड मेडल अपने नाम किया

– इसके बाद मीराबाई ने 2020 एशियन चैंपियनशिप में ब्रॉन्ज मेडल भी हासिल किया था

– इसके अलावा कॉमनवेल्थ गेम्स 2014 में सिल्वर और 2018 में गोल्ड मेडल अपने नाम किये

– इन सब उपलब्धियों के चलते उन्हें साल 2018 में सबसे बड़े खेल पुरस्कार राजीव गांधी खेल रत्न से नवाजा गया था

– इसके अलावा मीराबाई पद्मश्री पुरूस्कार से भी सम्मानित की जा चुकी है

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