मॉडर्ना और फाइजर जैसे विदेशी टीकों को अब भारत में क्लिनिकल ट्रायल की नहीं होगी आवश्यकता – DCGI

कोरोना की दूसरी लहर से आई संक्रमितों और मौत के आंकड़ों में तेजी के साथ टीकाकरण अभियान में भी गति आई है। बाहर के देशो में कुल आबादी का आधे से ज्यादा हिस्सा टीका लगवा चुका है।

मॉडर्ना और फाइजर जैसे विदेशी टीकों को अब भारत में क्लिनिकल ट्रायल की नहीं होगी आवश्यकता - DCGI
मॉडर्ना और फाइजर जैसे विदेशी टीकों को अब भारत में क्लिनिकल ट्रायल की नहीं होगी आवश्यकता - DCGI

(श्रद्धा उपाध्याय), Moderna and Pfizer: कोरोना की दूसरी लहर से आई संक्रमितों और मौत के आंकड़ों में तेजी के साथ टीकाकरण अभियान में भी गति आई है। बाहर के देशो में कुल आबादी का आधे से ज्यादा हिस्सा टीका लगवा चुका है। वही भारत में अभी यह आंकड़ा काफी कम है। हालांकि आने वाले दिनों में सरकार ने 1 दिन में करीब 1 करोड़ लोगो को टीका लगाने का लक्ष्य लिया है। ताकि ज्यादा से ज्यादा लोगो के वैक्सीन लग जाये। वही इसी बीच ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (डीसीजीआई) चीफ वीजी सोमानी ने एक नोटिस जारी कर भारत में चल रहे वैक्‍सीनेशन प्रोग्राम में तेजी लाने के मकसद से विदेशो से आने वाली वैक्सीन के भारत में क्लिनिकल ट्रायल से मुक्त कर दिया है।

DCGI द्वारा जारी नोटिस
डीसीजीआई ने अपने नोटिस में कहा है कि वो वैक्‍सीन, जिन्‍हें अमेरिकी एफडीए से आपातकालीन इस्तेमाल की मंजूरी मिल चुकी होगी, या जिन्‍हें विश्‍व स्‍वास्‍थ्‍य संगठन (WHO) ने आपात इस्‍तेमाल के लिए मंजूरी दे दी है उनका ट्रायल अब नहीं किया जाएगा। साथ ही उन वैक्‍सीन को भी इस ट्रायल से छूट मिलेगी, जिन्‍हें अब तक लाखों लोग लगवाकर इससे लाभान्वित हो चुके हैं। ऐसी किसी भी वैक्‍सीन को अब इस्‍तेमाल से पहले ट्रायल की जरूरत नहीं होगी।

बता दें ये प्रयास टीकाकरण अभियान को बढ़ावा देने और आयात को तेजी लाने के लिए किया जा रहा है। अभी हाल ही में भारत में रुसी वैक्सीन स्पूतनिक -वी की दो खेप भारत में पहुंचा दी जा चुकी है। और भारत में इसको मंजूरी भी दे दी गई है। वही अमेरिका की मॉडर्न और फाइजर भी भारत में आने वाली है। वही इस समय भारत में वैक्सीन की कमी के चलते कई सेंटर बंद है, जिससे वैक्सीनेशन प्रोग्राम में कमी आयी है। वही भारत में वैक्सीन के उत्पादन के लिए कच्चे माल की भी आवश्यकता है, इसके लिए भारत कई बार अमेरिका से बोल चुका है। इसी वजह से डीसीजीआई ने ये फैसला लिया है। क्यूंकि कितना ज्यादा वैक्सीनेशन होगा उतनी ज्यादा हम इस महामारी पर काबू पा लेंगे।

सरकार का लक्ष्य है इस साल के अंत तक पूरे भारत में वैक्सीनेशन करना है। इसके लिए अधिक मात्रा में वैक्सीन का होना बहुत जरूरी है। सरकार का कहना है कि उसे जुलाई तक प्रतिदिन एक करोड़ खुराक मिलने की उम्मीद है। विदेशी टीकों के इसमें बड़ी भूमिका निभाने की उम्मीद है। इस समय भारत में तीन वैक्सीन को मंजूरी मिल चुकी है जिनमे भारत बायोटेक के कोवैक्सिन, सीरम इंस्टीट्यूट के कोविशील्ड और रूस की स्पुतनिक वी शामिल है। मालूम हो इससे पहले भारत ने रूस की स्‍पू‍तनिक वी वैक्‍सीन को भी इमरजेंसी सेवा के तौर पर लगाने की मंजूरी दी थी।

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