Big announcement Delhi: आगामी शैक्षणिक सत्र से दिल्ली का अपना एजुकेशन बोर्ड होगा – सीएम अरविन्द केजरीवाल

दिल्ली: देश की राजधानी दिल्ली के सीएम अरविन्द केजरीवाल (Arvind Kejriwal) ने आज शनिवार को एक बड़ा एलान कर दिया है। घोषणा करते हुए

Big announcement Delhi: आगामी शैक्षणिक सत्र से दिल्ली का अपना एजुकेशन बोर्ड होगा - सीएम अरविन्द केजरीवाल
Big announcement Delhi: आगामी शैक्षणिक सत्र से दिल्ली का अपना एजुकेशन बोर्ड होगा - सीएम अरविन्द केजरीवाल

(श्रद्धा उपाध्याय), दिल्ली: देश की राजधानी दिल्ली के सीएम अरविन्द केजरीवाल (Arvind Kejriwal) ने आज शनिवार को एक बड़ा एलान कर दिया है। घोषणा करते हुए केजरीवाल ने कहा कि अगले शैक्षणिक वर्ष से दिल्ली का स्वयं का एजुकेशन बोर्ड होगा। यानि आगामी साल 2021-2022 में दिल्ली सरकार के 20-25 स्कूल CBSE बोर्ड के एफिलेशन से मुक्त हो जाएंगे। जिसके बाद इन्हे दिल्ली बोर्ड ऑफ स्कूल एजुकेशन (Delhi Board of School Education) से एफिलेटेड कर दिया जाएगा। वही दिल्‍ली के अलग बोर्ड को लेकर कैबिनेट की बैठक में मंजूरी दे दी गई है।

बता दें आज शनिवार सुबह दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल ने दिल्ली का अपना एजुकेशन बोर्ड बनाने का एलान कर दिया है। क्यूंकि अबतक केवल दिल्ली ही अपने बोर्ड से वंचित थी। यूपी, बिहार और अन्य प्रदेशो का अपना खुद का बोर्ड है। वही दिल्ली में अबतक CBSE एजुकेशन बोर्ड चलता था। वही केजरीवाल सरकार के आने से दिल्ली के सरकारी स्कूलो को शिक्षा नीति में कई तरह के सुधार हुए है। वही दिल्ली के लिए 2020 के वार्षिक बजट को पेश करते समय उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया (Manish Sisodia) ने एलान किया था कि सरकार 62 करोड़ रुपये की लागत से एक अलग राज्य शिक्षा बोर्ड स्थापित करेगी। जिसके बाद अब सीएम द्वारा ये फैसला लिया गया है।

अभिभावक और विशेषज्ञ ने उठाये ये सवाल
वही अब उनके इस फैसले के बाद अभिभावक और विशेषज्ञ इस फैसले पर सवाल उठा रहे हैं. उनका कहना है कि क्‍या अभी तक दिल्‍ली के सरकारी स्‍कूलों में चल रहे सीबीएसई बोर्ड को हटा दिया जाएगा? क्‍या दिल्‍ली बोर्ड सीबीएसई बोर्ड से बेहतर होगा या शिक्षा के स्‍तर को और खराब कर देगा? दिल्‍ली सरकार के नया बोर्ड लाने की सिफारिशों का विरोध कर रहे ऑल इंडिया पेरेंट्स एसोसिएशन के अध्‍यक्ष और एजुकेशन एक्टिविस्‍ट एडवोकेट अशोक अग्रवाल कहते हैं किे सीबीएसई बोर्ड से एफिलिएटेड दिल्‍ली के सरकारी स्‍कूलों के लिए अलग से बोर्ड बनाना सही फैसला नहीं है. सीबीएसई न सिर्फ केंद्रीय बोर्ड है और इससे मान्‍यता प्राप्‍त स्‍कूल पूरे देश में हैं बल्कि 21 अन्‍य देशों में भी सीबीएसई बोर्ड से पढ़ाई कराई जा रही है. ऐसे में इंटरनेशनल बोर्ड से हटाकर स्‍कूलों को राज्‍य बोर्ड में डालना बच्‍चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ है।

ये होगा फायदा
वही सीएम केजरीवाल ने इस बोर्ड के फायदे गिनाते हुए – “बताया कि दिल्ली बोर्ड ऑफ स्कूल एजुकेशन का मकसद स्टूडेंट्स को अच्छा इंसान बनाना, देशभक्त बनाना और स्टूडेंट्स को रोजगार के लिए तैयार करना है। वह बोले कि अब रटने पर नहीं बल्कि सीखने पर जोर होगा।’ वही दिल्ली बोर्ड ऑफ स्कूल एजुकेशन’ अंतरराष्ट्रीय स्तर का बोर्ड होगा।” वही अब CBSE ने मांग की है कि स्कूल अप्रैल में नया शैक्षणिक सत्र शुरू करें। उनका कहना है “हम एक बार में सभी स्कूलों को इस बोर्ड में ट्रांसफर नहीं करेंगे। पहले साल में, 20-25 सरकारी स्कूलों को दिल्ली बोर्ड के तहत लाया जाएगा।जिसके बाद CBSE से उनका एफिलेशन हटा दिया जाएगा और वे दिल्ली एजुकेशन बोर्ड से जुड़ जाएंगे।

आपको बता दें दिल्ली एजुकेशन द्वारा 1000 से अधिक स्कूल संचालित हैं, जो वर्तमान में CBSE से एफिलिएटेड है। जिनको अब धीरे-धीरे दिल्ली बोर्ड ऑफ़ एजुकेशन में स्थानांतरित किया जायेगा।

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