Farmers Protest: विदेशी हस्तियों की प्रतिक्रिया पर प्रहार, अमेरिका ने किया कृषि कानून का समर्थन

पिछले दो महीने से कृषि कानूनों के विरोध में धरना-प्रदर्शन कर रहें किसानों के समर्थन में अंतर्राष्ट्रीय हस्तियों के कुद पड़ने से भारत में काफी हलचल मची हुई

Farmers Protest: विदेशी हस्तियों की प्रतिक्रिया पर प्रहार, अमेरिका ने किया कृषि कानून का समर्थन
Farmers Protest: विदेशी हस्तियों की प्रतिक्रिया पर प्रहार, अमेरिका ने किया कृषि कानून का समर्थन
  • अमेरिका ने कृषि कानूनों को बताया सही
  • इंटरनेट आमजन को मुहैया कराना मजबूत लोकतंत्र की पहचान – अमेरिका
  • कोई भी दुष्प्रचार भारत की एकता को डिगा नहीं सकता है- शाह

(रिदम झा), Farmers Protest: पिछले दो महीने से कृषि कानूनों के विरोध में धरना-प्रदर्शन कर रहें किसानों के समर्थन में अंतर्राष्ट्रीय हस्तियों के कुद पड़ने से भारत में काफी हलचल मची हुई है।

जिसके बाद से किसान आंदोलन ने एक नया ही रूप ले लिया है। आपको बता दें कि ट्विटर के जरिए अमेरिका की उप राष्ट्रपति कमला हैरिस की भांजी मीना हैरिस, दुनिया की महशूर पॉप सिंगर स्टार रिहाना, स्वीडन की जलवायु कार्यकर्ता ग्रेटा थनबर्ग और पुर्व पोर्न स्टार मिया खलीफा ने किसानों के प्रदर्शन का समर्थन करते हुए ट्वीट किया था। इस बीच, किसान आंदोलन को समर्थन देने के नाम पर भारतीय लोकतंत्र को बर्बाद करने की अंतरराष्ट्रीय साजिश का खुलासा हुआ है। ग्रेटा थनबर्ग ने किसान आंदोलन के पक्ष में ट्वीट कर लिखा था, ‘हम भारत में किसानों के आंदोलन के प्रति एकजुट हैं। ‘ इसके साथ ही उन्होंने दूसरे ट्वीट में एक दस्तावेज़ साझा किया, जिसमें भारत सरकार पर अंतरराष्ट्रीय दबाव बनाने की कार्ययोजना साझा की गई थी और पांच तरह से दबाव बनाने की बात कही गई। हालांकि बाद में उन्होंने अपना ट्वीट डिलीट कर दिया।

हालांकि, भारत सरकार ने भी इसे लेकर बयान जारी किया है, भारत ने अंतर्राष्ट्रीय हस्तियों के टिप्पणी पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह ‘ना तो सही हैं और ना ही जिम्मेदाराना है। वहीं, गृह मंत्री शाह ने ट्वीट कर कहा,‘कोई भी दुष्प्रचार भारत की एकता को डिगा नहीं सकता है ! कोई भी दुष्प्रचार भारत को नई ऊंचाइयां छूने से रोक नहीं सकता है।’

साथ ही कई मशहूर हस्तियों अक्षय कुमार, कंगना रनौत, अजय देवगन और करण जौहर सहित कई मशहूर हस्तियां ने भी लोगों से दुष्प्रचार से दूर रहने का आह्वान करते हुए, इस अंतरराष्ट्रीय अजेंडा के खिलाफ ट्वीट किया है। वहीं, अमेरिकी विदेश विभाग ने किसान आंदोलन पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि ‘वह ऐसे कदमों का स्वागत करता है, जो भारत के बाजारों की दक्षता में सुधार करेंगे और निजी क्षेत्र के अधिक निवेश को आकर्षित करेंगे’। साथ ही अमेरिकी विदेश विभाग ने बयान में कहा, ‘हम ये मानते हैं कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन किसी भी लोकतंत्र की पहचान है। ऐसा भारत के सुप्रीम कोर्ट ने भी कहा है। हम बातचीत से समस्या के समाधान के पक्ष में हैं और भारत के बाजार को मजबूत करने और निवेश बढ़ाने की कोशिश का स्वागत करते हैं। लेकिन हमारा यह भी मानना हैं कि बिना किसी रुकावट के इंटरनेट आमजन को मुहैय्या कराया जाना मज़बूत लोकतंत्र के प्रतीक है।’

लोकसभा में भी उठा कृषि कानून का मुद्दा
लोकसभा में भी कृषि कानून का मुद्दा जोरशोर से उठाया गया है, जिसके बाद विपक्षी पार्टियों ने इस पर अलग से बहस कराने की मांग की जिसकी वजह से कार्यवाही कई बार स्थगित करनी पड़ी थी। राज्यसभा में कांग्रेस नेता गुलाम नबी आजाद ने भी आन का मुद्दा बनाए बिना तीनों कृषि कानूनों को वापस लेने की मांग की थी। वहीं, राकेश टिकैत ने तीनों कृषि कानूनों की वापस लेने की मांग दोहराई और मोदी सरकार को चेतावनी दी कि अगर प्रदर्शन जारी रहा तो उसकी सत्ता जा सकती है।

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